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पर्यटन

जिले के प्रमुख धार्मिक एतिहासिक और पर्यटन स्थलों के संबंध में :-

1). राजमहलः:-
   
गंगा नदी के तट पर अवस्थित यह शहर एतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। मुगल शासन के दौरान सम्राट अकबर के सेनापति मानसिंह ने सन्‌ 1592 ई0 में राजमहल शहर को बंगाल प्रान्त की राजधानी बनाये थे। आज भी राजमहल में काफी पुराने एतिहासिक इमारतों के अवशेष मौजूद है, जिसमें निम्नलिखित प्रमुख हैं।
(क) सिंधी दलान
(ख) अकबरी मस्जिद
(ग) मैना बीबी की मजार
(घ) मीरान का मजार

(2) मंगल हाट :-

राजमहल से 10 कि0मी0 पश्चिम दिशा में जामा मस्जिद अवस्थित है। यह मजिस्द मुगल सम्राट अकबर के शासन काल में बनाया गया था। इस स्थान को पर्यटन स्थल के रुप में बिकसीत किया जा सकता है।।

(3) कन्हैया स्थान :-

   राजमहल से 13 कि0मी0 पर अवस्थित कन्हैया स्थान भगवान कृष्ण के मंदिर के लिए विखयात है। यह माना जाता है कि बंगाल से लौटते समय श्री चैतन्य महाप्रभु यहाँ रूके थे तथा यहीं उन्हें भगवान के दर्शन भी हुए थे। श्री चैतन्य महाप्रभु के पद चिन्ह् इस जगह मौजूद हैं।
(4) तेलियागढ़ी :-
साहेबगंज में तेलियागढ़ी के नाम से पुराने किले में कुछ अवशेष मौजूद है। कहा जाता है कि इस किले के नीचे से 10 कि0मी0 लम्बी सुरंग मौजूद है। एक तेली जमिंदार द्वारा इस किले का निर्माण किया गया था, जो शाहजहां के समय में इस्लाम धर्म ग्रहण किया था। यह स्थान करमटोला स्टेशन के निकट अवस्थित है।
(5) शिवगादी :-
बरहेट प्रखंड में अवस्थित यह शिवलिंग गुफा के अन्दर है। इस शिवलिंग पर निरन्तर पानी टपकता रहता है। महाशिवरात्रि के अवसर पर विराट मेला आयोजित किया जाता है।

(6) बिन्दुवासिनी मंदिर :-

पतना प्रखंड में अवस्थित इस मंदिर में रामनवमी के अवसर पर 10 दिनों तक विराट मेला तथा यज्ञ का आयोजन किया जाता है। यह बड़हरवा स्टेद्गान से 2 कि0मी0 की दूरी पर अवस्थित है।

(7) शुक्रवासिनी मंदिर :-

    बड़हरवा प्रखंड के अन्तर्गत मिर्जापुर ग्राम के निकट यह मंदिर अवस्थित है।
(8) रक्सी स्थान :-

मंडरों प्रखंड के अन्तर्गत करमटोला रेलवे स्टेशन के निकट देवी का यह स्थान रक्सी स्थान के रूप में जाना जाता है। यह तेलियागड़ी भाग के पद्गिचम दिशा में स्थित है। यह मंदिर श्रद्धालुओ द्वारा बहुत घार्मिक माना जाता है। इसकी प्रतिमा बहुत पुरानी है। सदरलैंड ने इसके बारे अपनी एक व्यान में 1819 में जानकारी दी थी। काफी संखया में श्रद्धालु इस स्थान पर पूजा अर्चना करने आते है।

(9) भोगनाडीह तथा पंचकठियाः :

   अमर क्रांतिवीर सिदो-कानू की जन्म स्थली के रूप में भोगनाडीह मशहूर है। यहाँ उनका स्मारक भी अवस्थित है। भोगनाडीह के कुछ ही दूरी पर पंचकठिया में सिदो-कानू को फाँसी दी गयी थी। वह स्थल लोगों का श्रद्धास्थान है। दोनो भाई सिदो-कानू ने सन्‌ 1855 में संथाल विद्रोह का नेतृत्व किए थे।

(10) उधवा पक्षी अभ्यारण्य :-

झारखंड राज्य में उधवा पक्षी अभ्यारण्य अपने तरह का एक-मात्र जगह है। सर्दियों के मौसम में यूरोप एवं साइबेरिया से बड़ी संखया में सैलानी विदेशी पक्षियों का यहाँ आगमन होता है। यह अभ्यारण्य पतौड़ा झील के नाम से भी प्रसिद्ध है।

(11) मोती झरना :- मोती झरना महाराजपुर के निकट एक प्राकृतिक स्थल है। यह झरना राजमहल पहाड़ियों से निकलती है। दर्शको के लिए यह एक प्राकृतिक मनोरंजन स्थल है।

(12) माघी मेला :- माघी पूर्णिमा के अवसर पर प्रत्येक वर्ष राजमहल गंगा किनारे विशाल मेला आयोजित किया जाता है, जिसमें जिले के सभी भाग से बड़ी संखया में आदिवासी सम्मिलित होते हैं। आदिवासी रिती-रिवाजों के तहत उनके धर्म गुरू के साथ पूजा अर्चना की जाती है।